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देहरादून में इंडिया ड्रोन फेस्टिवल-2019 का शुभारम्भ, पद्मश्री बसंती देवी बिष्ट ने जागर गायन से दिया अपनी जड़ों की ओर लौटने का रैबार, संतुलन के साथ सबका विकास, रैबार से विकास का आगाज, एकजुट-एकमुठ होकर आगे बढ़े युवा उत्तराखंड, सामूहिक चिंतन से ही निकलेगी विकास की राह, पर्यटन व संस्कृति बन सकते हैं विकास की धुरी, उत्तराखंड ही बने भावी पीढ़ी का भाग्यनिर्माता, हिमालयन डेवलपमेंट का नया मॉडल लाया जाए, निर्धारित आय न होने से बढ़ा पलायन, शिक्षा से पलायन रोकने का अभिनव प्रयास।

रैबार

रैबार
पहाड़ों की ओर लौटने का एक अभियान।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति को फिर से जीने का अवसर !


‘‘रैबार’’ का अर्थ है संदेश। ‘‘रैबार’’ मंच के माध्यम से हम आपको उत्तराखंड के उन खास लोगों को रूबरू करवाएंगे जिन्होंने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘‘रैबार’’ के बैनर तले हम इन लोगों को उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों और कस्बों में लेकर जायेंगे और वहां पर चर्चाओं एवं विचार गोष्ठियों का आयोजन करके हम इन प्रबुद्ध लोगों के विचार आम और खास लोगों तक पहुंचाएंगे तथा वहां के लोग पहाड़ से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सबके सामने भी रख सकेंगे। 


विकास एक लगातार बहने वाली नदी है, जिसकी गति अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर तेज हो जाती है और प्रतिकूल होने पर धीमी। कई बार तो यह इतनी धीमी पड़ जाती है कि हमें इसके ठहर जाने का आभास होने लगता है। उचित दिशा और दशा तय न की जाए तो विकास अपने मार्ग पर आगे बढ़ते हुए विनाश का भी कारण बन सकता है। इस नदी के बहाव में एकरूपता, तीव्रता और निरंतरता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि इसके लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण हो और ऐसी दिशा व दशा तय की जाए कि यह विकास की पवित्र गंगा लोक कल्याणकारी बनकर आगे बढ़ती रहे।


हम ‘‘रैबार’’ के माध्यम से उत्तराखंड के प्रबुद्ध लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें आकर वह अपना अमूल्य अनुभव पहाड़ के युवाओं और गणमान्य लोगों के साथ साझा करेंगे और राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए कैसे प्रयास किये जाने चाहिए इसके लिए राज्य सरकार का मार्गदर्शन भी करेंगे। जिससे कि उत्तराखंड तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे।

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