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पद्मश्री बसंती देवी बिष्ट ने जागर गायन से दिया अपनी जड़ों की ओर लौटने का रैबार

Jan 24, 2018

हिल मेल: एक अभियान पहाड़ों की ओर लौटने का - ने अपनी पहल रैबार को आगे बढ़ाते हुए नई दिल्ली के मुक्त धारा सूचना एवं संस्कृति केंद्र में 22 जनवरी को जागर सम्राज्ञी पद्मश्री बसंती देवी बिष्ट के जागर गायन का आयोजन किया। बसंती देवी बिष्ट के कुमाऊंनी और गढ़वाली जागर गायन से श्रोता अभिभूत नजर आए।

जागर जिसका शाब्दिक अर्थ होता है जगाना। अपनी संस्कृति को संवेदनशीलता से याद रखने के प्रयास में यह आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में जागर एवं लोककला प्रेमियों ने इस प्रस्तुति का आनंद उठाया। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड की कई प्रबुद्ध शख्सियतें जागर सुनने पहुंचीं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के सचिव श्री भास्कर खुल्बे, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन श्री अश्विनी लोहानी, कोस्टगार्ड के प्रमुख राजेंद्र सिंह, ब्रहमोस के सीएमडी सुधीर कुमार मिश्रा और ओएनजीसी के डारेक्टर (एचआर) श्री डीडी मिश्रा उपस्थिति थे। श्री भास्कर खुल्बे ने श्रीमती बसंती देवी बिष्ट को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर भास्कर खुल्बे ने कहा, आज पद्मश्री बसंती देवी बिष्ट ने हमें बिल्कुल चेता दिया कि देखिए, महिलाएं बदलाव की प्रतीक हैं। उन्हें भूलना नहीं हैं। उत्तराखंड की महिलाएं अगर बदलाव लाएंगी तो विकास बहुत तेजी से होगा। जागर के माध्यम से यह संदेश संभवतः सभी तक पहुंच गया है। वहीं रेलवे बोर्ड से चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि वह सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ते हुए जागर के मंच पर पहुंची हैं। उनकी यात्रा इसलिए अद्भुत है क्योंकि जब यह शुरू हुई थी,तब इस बारे में सोचना भी काफी कठिन था। कोस्टगार्ड के प्रमुख राजेंद्र सिंह ने कहा कि श्रीमती बिष्ट जैसे समर्पित लोकगायकों के कारण उत्तराखंड की यह विधा आज भी संरक्षित और सुरक्षित है। नई पीढ़ी तक जागर को सुनने और समझने का प्रयास कर रही है। ऐसे में हिल-मेल की यह पहल काफी प्रासंगिक हो जाती है।

इस आयोजन के बारे में बताते हुए हिल-मेल फाउंडेशन की सम्पादक चेतना नेगी ने बताया कि हमारा प्रयास रैबार के माध्यम से प्रवासी उत्तराखंडियों को उनकी जड़ों से फिर जोड़ना है। आज जब पलायन उत्तराखंड की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया है, इस पहल से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि लोग अपने गांवों की बात करें, वहां जाने पर विचार करें। वह जागर ही हैं, जो उत्तराखंड को सीधे अपने गांवों, देवी-देवताओं से जोड़ने हैं। लिहाजा इसकी शुरुआत जागर गायन से बेहतर क्या हो सकती है।

इस मौके पर हिल मेल का खास संस्करण और यूथ फाउंडेशन की स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व वाले यूथ फाउंडेशन, उत्तराखंड जल विद्युत निगम, उत्तराखंड सरकार और बंगाल रेजीडेंस का विशेष सहयोग रहा।
 

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