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स्पेस सेक्टर में बुलंदी हासिल कर सकते हैं उत्तराखंड के युवा

Jan 10, 2022

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटा.) महानिदेशक, भारतीय अंतरिक्ष संघ

मैं हिल-मेल की पूरी टीम को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि मुझे आपने हमारे गौरवशाली व्यक्तित्व को याद के लिए यहां पर बुलाया। मेरे लिए यह बहुत गर्व का विषय है। खुद मेरे लिए गौरव की बात है कि मुझे भारतीय सेना में नौकरी करने का मौका मिला और उसके लिए मैं इस देवभूमि को धन्यवाद देना चाहता हूं, क्योंकि मैं यहां पैदा हुआ।

जो भी चीजें मैंने अपने बचपन में मसूरी में अपने माता-पिता के साथ रहते हुई सीखीं, जो संस्कार मैंने उनसे लिए उन्हीं संस्कारों के कारण जीवन में, मैं यहां पहुंच पाया हूं और वो संस्कार क्या थे, ये मैं आपको बताना चाहूंगा। वो थे ईमानदारी, वफादारी और मेहनत। हमारे पिता ने हमेशा हमें यही कहा कि अच्छी पढ़ाई और मेहनत दुनिया में सारे दरवाजे खोल देती है और उनका कहना सच हुआ।

आज मुझे जिम्मेदारी दी गई है कि भारत के स्पेस के बारे में और भारतीय स्पेस का उत्तराखंड में विस्तार उसके बारे में आपको बताऊंगा। पहले तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि आप सब आज भारत के स्पेस के जो आउटपुट हैं, उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। आप लोग जब अपना टीवी आन करते हैं, जो डीटीएच से कनेक्टेड है वो उसी सेटेलाइट से कनेक्टेड है।

आप जब एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए गूगल लोकेशन देखते हैं वो गूगल जो आपको रास्ता बता रहा है, यह भी सेटेलाइट से ही होता है। इसके अलावा आज डिजास्टर मैनेजमैंट और सबसे जरूरी आज उत्तराखंड में दूर दराज इलाकों में कनेक्शन के लिए सेटेलाइट से बढ़िया कोई अच्छी चीज नहीं हैं। जहां टावर बनाना बहुत मुश्किल है, बहुत ज्यादा महंगा है, वहां एक ही सेटेलाइट पूरे उत्तराखंड को कम्युनिकेशन दे सकती है।

अब बात कि इस कम्युनिकेशन के क्या फायदे हैं? कम्युनिकेशन द्वारा हर घर, हर गांव, स्कूल में पढ़ाई कराई जा सकती है और उससे ज्यादा जरूरी है मेडिकल ट्रीटमेंट। इसके लिए हर जगह, हर गांव में किसी अच्छे डॉक्टर की मुंबई या दिल्ली से कनेक्टिविटी हो सकती है। ये जो मैं आपको बोल रहा हूं, यह सपना नहीं है यह सब मुमकिन है और यह सब हो रहा है।

जरूरी यह है कि उत्तराखंड में भी होगा। आज सुबह मैंने एक जवान लड़के से बात की, जिसकी उम्र 22 साल की है, उसका नाम है राहुल रावत। राहुल रावत पौडी के पास मथाणा गांव का है। 2004 में उसके पिताजी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कोटद्वार लेकर आये। कोटद्वार में उसने अपनी 12वीं तक पढ़ाई की।

उसके बाद उसने कम्प्यूटर की पढ़ाई पंजाब से की और आज उस लड़के ने एक नया स्टार्टअप शुरू किया है। वह स्पेस में सेटेलाइट द्वारा और सेटेलाइट को डिटेक्ट करने और मौसम को डिटेक्ट करने के लिए काम कर रहा है। वह और उसके दो साथियों, यानि कि तीन लोगों को 18 करोड़ का एक वेंचर कैपिटल ने पैसा दिया है।

मुझे पूरा विश्वास है और मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी पहली सेटेलाइट जल्द ही ब्रहमांड में होगी। वह इस काम को कर रहे हैं जो केवल अमेरिका में ही होता है। वह डेव्यूडिडेक्शन के काम में सफल रहे तो उत्तराखंड का नाम पूरी दुनिया में फैलाएगा।

इस उदाहरण को देने का कारण यह है कि एक कोटद्वार का पढ़ा हुआ लडका, जिसने अपना कम्प्यूटर साइंस पंजाब में किया आज स्पेस में 22 साल की उम्र में लीड कर रहा है। हमको ऐसे गढ़वाली और कुमाऊंनी बच्चे चाहिए, हमको उत्तराखंड के और ऐसे बालक चाहिए। ये तभी हो सकते हैं जब हम अपनी यूनिवर्सिटी में और अपनी शिक्षा के लिए फोकस करें। मुझे पूरा विश्वास है कि यह आगे निश्चित तौर पर होगा।

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