पहाड़ों की ओर लौटने का एक अभियान।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति को फिर से जीने का अवसर !
‘रैबार’ का अर्थ है संदेश। ‘रैबार’ मंच के माध्यम से हम आपको उत्तराखंड के उन खास लोगों को रूबरू करवाते हैं जिन्होंने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘रैबार’ के बैनर तले हम इन लोगों को देश और उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों, कस्बों में लेकर आते हैं और वहां पर चर्चाओं एवं विचार गोष्ठियों का आयोजन करके हम इन प्रबुद्ध लोगों के विचार आम और खास लोगों तक पहुंचाते हैं तथा वहां के लोग पहाड़ से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सबके सामने रखते हैं।
विकास एक लगातार बहने वाली नदी है, जिसकी गति अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर तेज हो जाती है और प्रतिकूल होने पर धीमी। कई बार तो यह इतनी धीमी पड़ जाती है कि हमें इसके ठहर जाने का आभास होने लगता है। उचित दिशा और दशा तय न की जाए तो विकास अपने मार्ग पर आगे बढ़ते हुए विनाश का भी कारण बन सकता है। इस नदी के बहाव में एकरूपता, तीव्रता और निरंतरता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि इसके लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण हो और ऐसी दिशा व दशा तय की जाए कि यह विकास की पवित्र गंगा लोक कल्याणकारी बनकर आगे बढ़ती रहे।
हम ‘रैबार’ के माध्यम से उत्तराखंड के प्रबुद्ध लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें आकर वह अपना अमूल्य अनुभव पहाड़ के युवाओं और गणमान्य लोगों के साथ साझा करते हैं और राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए कैसे प्रयास किये जाने चाहिए इसके लिए राज्य सरकार का मार्गदर्शन भी करते हैं। जिससे कि उत्तराखंड तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे।