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आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तराखंड में चल रहीं कई योजनाएं

राजेंद्र सिंह, सदस्य, एनडीएमए

कोविड-19 ने हमें कोई चीज सिखाई तो वह यह कि ग्लोबल इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए एक दूसरे का सहयोग करना ही होगा। इंटरडिपेंडेट और इंटरकनेक्टेड माध्यम हमें इस चीज से निजात दिला सकता है। जब उत्तराखंड की बात होती है तो यह आपदा संभावित प्रदेश है।

भूकंप से लेकर लैंडस्लाइड, ग्लेशियर, कोल्ड वेव,फॉरेस्ट फायर, ऐसी कोई आपदा नहीं है जो यहां ना आती हो। इस समय उत्तराखंड को जरूरत है एक सपोर्ट की, मिलकर काम करने की, क्योंकि जब हम थोड़ा-थोड़ा काम करेंगे तो शायद भविष्य में हम आपदाओँ का अच्छी तरह से सामना कर सकेंगे।

2005 में एनडीएमए एक्ट आया। 2009 में डिजास्टर मैनेंजमेंट की पॉलिसी आई। 2016 में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 प्वाइंट एजेंडा डिजास्टर के फील्ड में दिया। 2019 में भारत एक ऐसा देश रहा, जिसने अपना नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान विश्व के सामने रखा।

इस एनडीएमपी यानी नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान का जो असर हुआ है, हर राज्य को, हर जिले को, हर विभाग को भारत सरकार ने यह आदेश दिए कि अपना-अपना डिजास्टर मैंनेजमेंट तैयार करें और एनडीएमए से इसका अप्रूवल लें। आज के दिन करीब-करीब 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने ये प्लान सौंप दिया है।

देश के 737 जिलों में अगर हम देखते हैं तो 652 जिलों ने अपना डिजास्टर मैंनेजमेंट प्लान दिया है और हमने अप्रूव करके हर जिले में वह प्लान भी डेडीकेट कर दिया है। डिजास्टर के ऊपर हमने करीब-करीब 31 गाइडलाइन बनाई हैं। ऐसी कोई डिजास्टर नहीं जिसके ऊपर हमने समयबद्ध गाइडलाइन न बनाई हो।

अभी इसी साल 3 से 4 मेजर प्रोजेक्ट एनडीएमए में मैंने अप्रूव किए हैं। एक है आपदा मित्र स्कीम जो हमने पहले 737 जिलों में ऐसे 350 जिले चिन्हित किए हैं, जहां भूकंप आता हो, जहां लैंडस्लाइड होती हो, जहां फ्लड हो और जहां साइक्लोन आता हो।

350 जिलों में करीब एक लाख वॉलंटियर्स हम ट्रेन करके समाज को समर्पित कर रहे हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के अतिरिक्त हम एक लाख वॉलंटियर्स की फोर्स खड़ी कर रहे हैं। पहले फेज में उत्तराखंड में 200 वॉलंटियर्स हरिद्वार में काम कर रहे हैं जिन्होंने करीब 135 लाइफ को बचाया है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन मेरे पास है, इस साल उत्तराखंड के 11 और जिले हमने इसमें सम्मिलित कर दिए हैं। अगले साल अक्टूबर तक करीब-करीब 1700 से1800 वॉलंटियर्सआपदा से लड़ने के लिए तैयार होंगे। हर जिले में करीब 22 लाख के इक्यूपमेंट भी हम 3 जिलों के पास खरीदकर दे रहे हैं।

यह आपदा स्कीम लॉन्च हो चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 28 सितंबर को इस स्कीम को लॉन्च किया। एक और स्कीम हमने लॉन्च की थी, उसका नाम है नेशनल स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम। इसका दूसरा फेज हम ला रहे हैं। इसके तहत हमने 21 राज्यों में 44 जिले सम्मिलित किए थे।

हर जिले में 200 स्कूल हमने चिन्हित किएऔर 200 स्कूल मतलब टोटल 8600 स्कूल को हमने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में तैयार किया है। उत्तराखंड में बागेश्वर और रुद्रप्रयाग दोनों जिले इसमें सम्मिलित थे। तीसरी चीज जो मुख्य थी वो है कैप यानी कॉमन एलर्ट प्रोटोकॉल।

अभी तक जो भी जानकारी हमें आपदाओं की मिलती थी तो कभी मेघदूत, दामिनी इतने ऐप बन चुके हैं कि आदमी कन्फ्यूज हो जाता था कि किसकी बात मानें औरकिसकी नहीं। अब हम सभी को एक प्लेटफॉर्म में लेकर आए हैं।

एक नेशनल प्रोग्राम ऑनलाइन क्लाइंट रिस्क डिडेक्शन पर है। इसमें 15वें वित्त आयोग ने 750 करोड़ रुपये हम लोगों को दिए हैं। जिसमें 250 करोड़ रुपये सिर्फ उत्तराखंड के हिस्से में आए हैं। 50 करोड़ रुपये हर साल हम आपदा पर खर्च कर सकते हैं।

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