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बॉर्डर स्टेट में पलायन बर्दाश्त नहीं, लोगों को फिर से बसाना होगा

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटा.), राज्यपाल उत्तराखंड

यह क्षण और यह जगह और इस वक्त जो भाव है, जो भावना है, थोड़ी भावुकता भी है, थोड़ा गर्व भी है, राष्ट्र प्रेम, राष्ट्रभक्ति, राष्ट्र सुरक्षा का एक अहसास भी है। यह क्षण एक वीर योद्धा को स्मरण करने का अवसर है। रैबार बहुत ही खूबसूरत शब्द है, मैंने जब पूछा कि इसका मतलब क्या है तो मुझे बताया गया, इसका मतलब है संदेश। एक संदेश देना अपनी आत्मा से, एक संदेश देना अपनी आत्मा से स्वर्ग में बैठे हुए जनरल बिपिन रावत साहब को और जो वीर योद्धा उनके साथ थे उनको, एक संदेश देना अपनी मातृभूमि अपनी देवभूमि को। सच में संदेश देने के लिए गंगा के किनारे और जानकी सेतु के आंचल से अच्छी जगह कोई और नहीं हो सकती।आज हम यहां गंगा नदी के किनारे बैठ कर देवभूमि के उस महान बेटे को याद कर रहे हैं, जो अब हमारे बीच में नहीं है। ऐसे वीर सपूत, ऐसे लीडर, ऐसा देशभक्त इतिहास में कभी-कभी विरले आते हैं। वह अलग किस्म के योद्धा थेIमैंने उन्हें 1974 में नेशनल डिफेंस एकेडमी में देखा। हम दोनों एक ही स्क्वॉड्रन के थे। मैं उनसे डेढ़ साल सीनियर था। वो हमारे पूरे राष्ट्र के लिए, हमारे उत्तराखंड के लिए और हमारी पौड़ी के लिए एक बहुत बड़ा गर्व थे। उनका जाना कुछ ऐसा है, जैसे हर किसी ने अपने को खोया हो। उस दिन आपको याद होगा कि जब अंतिम संस्कार के लिएबरार स्क्वॉयर ले जाना था तो किस प्रकार लोग आगे-आगे भाग रहे थे। किस प्रकार से भावना उमड़ रही थी, यह बिल्कुल ही अलग था। मैंने भी जनरल रावत के रूप में एक दोस्त, एक बडी, एक स्क्वॉड्रन साथी को खोया है। एक एनडीए स्क्वॉड्रन का जाना मेरे लिए भी निजी क्षति है। मैंने उनके साथ में कश्मीर के अंदर ब्रिगेड कमांडर का काम किया था, एक ही टाइम पर हम दोनों ब्रिगेड कमांडर थे और बहुत करीब से उनको बहुत चुनौतीपूर्ण वातावरण में देखा। उनके साथ मेरे फौजी जीवन में बहुत ऐसे लम्हे हैं, बहुत यादें हैं जो जुड़ी हुई हैं।वह ऐसे भाग्यशाली क्षण थे, जब हमें साथ-साथ कार्य करने का अवसर मिला।

उत्तराखंड को 21 साल पूरे हो चुके हैं। अब उत्तराखंड विकास के रास्ते पर रफ्तार पकड़ने को बेकरार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि 21वीं सदी तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। उन्होंने केदारनाथ मंदिर के प्रांगण से यह बात कही थी। उत्तराखंड सरकार भी यहां विकास कार्यो को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम हो रहा है और आने वाले दिनों में इसके रिजल्ट भी हम सबके सामने आएंगे, ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है। उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है, सैनिक धाम है, वीर योद्धाओं की भूमि है और इसमें जनरल बिपिन रावत ने अपना एक ऐतिहासिक अध्याय छोड़ा है। वह हम सबके लिए एक प्रेरणा हैं। यहां ऐसा कोई घरनहीं है, जहां फौजी नहीं है, यहां ऐसा कोई घर नहीं है जहां बेल्ट और टोपी नहीं है। हर एक घर के अंदर वो सैनिक है, बॉर्डर स्टेट है, लोग अपनी जिम्मेवारियां समझते हैं। लेकिन बॉर्डर स्टेट में पलायन बर्दाश्त नहीं है। हमें दोबारा वहां लोगों को बसाना ही होगा। इस राज्य के गवर्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद मैंने ज्यादा यही कोशिश की है कि पूर्व सैनिकों के साथ ज्यादा से ज्यादा संवाद कर सकूं। मेरे जितने भी साथी मेरे कंटेंपरेरी, मेरे कोर्समेट हैं, उत्तराखंड के है। मैं उनको यही बोलता हूं कि सफलता प्राप्त करने के बाद वापस आइए अपने घऱ में, आपका घर आपका इंतजार कर रहा है।

हाल ही में मैं पौड़ी और टिहरी गया था, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाएं देखीं। उत्तराखंड की महिलाएं प्रबल है, उनके अंदर इतनी शक्ति है। उनके अंदर क्षमता हैऔर मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन जगहों पर क्रांति आएगी तो महिलाओं के बलबूते पर ही आएगी। जाकर उनकी मदद कीजिए, उत्तराखंड बॉर्डर स्टेट है, यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा राज्य है। ऐसे में सीमांत इलाकों में काफी काम करने की जरूरत है। अब तेजी से बॉर्डर के इलाकों में सड़कें बन रही हैं। बीआरओ भी बहुत अच्छा काम कर रहा है। वहां लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही है। लेकिन उस लेवल की नहीं है जिस तरह हमको गंगा मैया और जमुना जी कहती हैं कि होनी चाहिए हमको और भी इस विषय में काम करना पड़ेगा। आज भारत में रोड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में क्रांति हो रही है। जिस प्रकार सड़कें बन रही हैं तो एक बहुत बड़ा बदलाव है। उत्तराखंड में विकास औऱ कनेक्टिविटी कीबहुत बड़ी भूमिका है। राज्य में जहां सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता। वहां रोप वे का विकास किया जा रहा है। देवभूमि को आज अपने अनुभवी बेटे और बेटियों की जरूरत है। हम मिलकर इस राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे, यह मेरा पूर्ण विश्वास है। रैबार मतलब संदेश मतलब इनविटेशन, इस संदेश को आज आपने पुरोया है। यह अवश्य ही हमारे सोच विचार को एक ऊंचे स्तर पर ले जाने वाला है। दो शब्द हैं, जो हमको एक सूत्र बांधते हैं, दो शब्द हैं जो हमको हर एक स्तर से राष्ट्र के स्तर तक ले जाते हैं और वो दो शब्द हैं…जय हिंद।

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