हिल-मेल- पहाड़ की चिट्ठी के कार्यक्रमों में हम काफी समय से शिरकत करते आ रहे हैं। अभी तक ये प्रवासी कार्यक्रम था, पहली बार इसे पहाड़ की ओर मोड़ा गया है। यहां पर कई लोगों ने अपनी बातें रखीं। आज उत्तराखंड के नौ रत्न यहां आए हैं। ओएनजीसी और गेल ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके लिए उनका भी आभार है। मैं जहां भी जाता हूं लोग कहते हैं कि इस बार उत्तराखंड का दबदबा पूरे भारतवर्ष में हैं। इस कारण हमें भी गर्व की अनुभूति होती है कि हम उत्तराखंड के रहने वाले हैं। यहां के सपूतों ने देश में ही नहीं विदेशों में भी अपना और प्रदेश का नाम ऊंचा किया है।
मुझे क्योंकि मेरे विषय से बांध रखा है लिहाजा में उच्च शिक्षा पर दो तीन बातें रखूंगा। उत्तराखंड आबादी के लिहाज से सबसे छोटे राज्यों में से एक है, लेकिन हमारे यहां 31 विश्वविद्यालय हैं। दो-तीन विश्वविद्यालय पाइपलाइन में हैं। साथ ही मुख्यमंत्री जी ने 4 विश्वविद्यालयों का जिक्र किया है, जो केंद्र से आने वाले हैं। उसमें से काफी चीजें आ गई हैं। सात बड़े संस्थान हमारे प्रदेश में केंद्र के हैं। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी जैसे बड़े-बड़े संस्थान हैं। 100 हमारे डिग्री कॉलेज सरकारी हैं। इसके अलावा 19 सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं, जिनको तनख्वाह हम देते हैं।
आज मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूं कि देश में उत्तराखंड पहला राज्य है जिसमें प्रत्येक कॉलेज में प्राचार्य और प्रोफेसर दे दिए हैं। केरल में 68 फीसदी और हिमाचल में 66 फीसदी प्राचार्य हैं, एक-एक प्राचार्य दो-दो कॉलेजों को देखते हैं। लेकिन हमने डीपीसी की, क्योंकि मुख्यमंत्री जी का फोकस है कि हमें उच्च शिक्षा बहुत ठीक करनी है। हमारे यहां प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का स्तर काफी अच्छा है। मुख्यमंत्री जी का कहना है कि उच्च शिक्षा में हमने बहुत अच्छी पहल की तो पलायन रुक सकता है। हम सुपर-30 चला रहे हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सुपर-30 में से 24 बच्चे इस बार आईआईटी में सलेक्ट हुए हैं। अभी हमने सुपर-100 लांच किया है और गेल के माध्यम से हम उसे चलाने वाले हैं। वो भी हम पहाड़ में ले जा रहे हैं। सुपर-50 हम अल्मोड़ा में दे रहे हैं और सुपर-50 हम श्रीनगर में दे रहे हैं। 50 बच्चों को हम आईएएस-पीसीएस की कोचिंग कराएंगे।
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि 100 बच्चों को टैलेंट सर्च के आधार पर चुनिए और उन्हें अच्छी रिसर्च करवाइये। जो अच्छी रिसर्च करेंगे वो देश और दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकेंगे। मुझे लगता है कि हम शिक्षा के माध्यम से पलायन रोकने के लिए बहुत अभिनव प्रयोग कर रहे हैं।
आपने पॉलीटेक्निक, आईआईटी की बात की, मुझे भी लग रहा है कि आईटीआई में काफी सुधार करने की गुंजाइश है। इसी तरह जो विश्वविद्यालयों में हमारे प्रोफेसर हैं, उन्हें इस बार हम अंतर-विश्वविद्यालय एक्सचेंज करवा रहे हैं। हम दूसरे विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों के लेक्चर अपने 100 विश्वविद्यालयों में करवाएंगे। ताकि देश-दुनिया के अच्छे प्रोफेसरों के लेक्चर यहां के बच्चों को मिल सकें।
मुझे बहुत अच्छा लगा कि राजेंद्र जी ने कहा कि आप हमें बुलाएंगे तो हम आएंगे। मैं तो मौका चाह रहा था कि कब कोई ऐसा कहे। अभी तक चकरौता में दो ही पोस्टर लगते थे अब तीसरा लगने की भी संभावना है। मातृभूमि, मातृभाषा के लिए जो यह प्रयास हमने किया है, उसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी को साधुवाद देना चाहता हूं।












