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सामूहिक चिंतन से ही निकलेगी विकास की राह – भास्कर खुल्बे, सचिव, प्रधानमंत्री

December 8, 2019
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सामूहिक चिंतन से ही निकलेगी विकास की राह – भास्कर खुल्बे, सचिव, प्रधानमंत्री
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घर वापस आने पर जैसी अनुभूति होती है, कुमाऊंनी में जिसे नराई कहते हैं, मेरी अनुभूति कुछ वैसी ही है। जब ये कार्यक्रम शुरू हुआ तो एक खुखरी नृत्य देखा। मेरे विचार से आज 17 साल हो गए इस राज्य को बने हुए, ये नृत्य आपने आप कह रहा था कि इस राज्य को क्या करना चाहिए। आपने अगर ध्यान दिया होगा तो जो बच्चे डांस कर रहे थे, उन्होंने युवा परिवेश धारण कर रखा था। लेकिन हाथ में खुखरी थी और साथ में उन्होंने गले में तिरंगा डाल रखा था। अब अगर आप लोग सोचो कि बिल्कुल युवा परिवेश, हाथ में खुखरी और सीने पर तिरंगा। तो शायद राज्य को ऐसा ही करना है। हम युवा साहस रखें। हम 17 साल पूरे कर चुके हैं। खुखरी रखें यानी बल रखें। कहने का अर्थ यह है कि हम में इतना संबल है कि जो चाहेंगे वो कर लेंगे और भारत हमें कभी भूले नहीं। 


अब बात जहां तक है कि इस रैबार में हम लोग क्या कर सकते हैं। मेरे ख्याल से पहली पहल जो मंजीत नेगी जी ने मुख्यमंत्री जी के आग्रह पर यह आयोजन किया वह इस बात का प्रमाण है कि अगर हम सब एक साथ मिलकर यह चिंतन करें, यह मंथन करें तो उत्तराखंड के लिए हम कोई ने कोई अच्छी बात जरूर सोच सकेंगे। करने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है। साधन भी हैं और जैसा कि अभी अमित नेगी जी ने अपने प्रजेंटेशन में बताया कि हम किसी भी राज्य से स्पर्धा कर सकते हैं। हम उनसे पीछे नहीं हैं। अभी मुख्यमंत्री जी ने जो कहा, उस पर ध्यान देने की जरूरत है। स्किल डेवलपमेंट करने के लिए हमें इस राज्य में क्या करना चाहिए। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा क्योंकि आपको यह न लगे कि मैं ही सबकुछ कह रहा हूं लेकिन मैं चाहूंगा कि मेरे साथी लोग भी अपनी बात कहें। जो लोग बाहर से आए हैं और हमारे साथ काम करना चाहते हैं, वो क्या कहते हैं इससे ज्यादा हम इस पर जोर दें कि हम क्या चाहते हैं, ये अगर बताएंगे तो हम सब तय कर पाएंगे कि क्या करना है। 


बचपन की एक बात याद आ रही है, जब कोई बीमार होता था गांव में तो पूछारे के पास जाते थे। वो हाथ में चावल लेकर के पूछता था कि साहूकार बता ऐसा हुआ था कि नहीं, वैसे ही हम पूछ सकते हैं कि क्यों किया ऐसा, उत्तराखंड तो अपना है, चाहे दिल्ली से देखो, चाहे नैनीताल से देखो, चाहे देहरादून में बैठकर देखो विकास उसी का करना है।  मेरे ख्याल से पांच-छह चीजें जो इस चर्चा से निकलकर जो सामने आई हैं, सबके लिए ध्यान देने योग्य हैं कि पलायन अगर हो रहा है उत्तराखंड से तो शायद हमें नोटिस करना चाहिए कि शायद कोई कील चुभ रही है। तो जूता खोलकर उसे निकाल लेना चाहिए। मैं अगर कुछ जिलों की बात करूं तो बच्चे जहां अच्छा पढ़ते हैं, वहां पढ़ते हैं और वहां से आगे चले जाते हैं, जहां सुविधा नहीं है अगर हाईस्कूल की। अगर वहां वोकेशनल ट्रेनिंग की सुविधा वहां करनी है तो हमें देखना होगा कि हमारे आईटीआई राज्य में ऐसी सारी जगहों पर उपलब्ध हैं, जहां बच्चों को आईटीआई की सुविधा चाहिए। मैं नैनीताल से पढ़ा हूं तो मैं कह सकता हूं कि हल्द्वानी, काठगोदाम, रूद्रपुर के आसपास बहुत सारे आईटीआई और जहां होने चाहिए वहीं नहीं हैं। क्या हम मैपिंग कर सकते हैं, राज्य में हमारी जरूरत क्या है। मैपिंग करना बहुत बड़ी चीज नहीं है। मैं इसका उदाहरण देता हूं। हम अगर यह निर्धारित कर लें कि उत्तरकाशी जिले में विकास करना है। तो हम जिला अधिकारी के साथ पांच घंटे छह घंटे बैठकर ये पूछ लें कि तुम बताओ, अगले दस साल में तुम्हारे जिले में क्या होने वाला है, क्या कोई पावर प्लांट लगने वाला है, क्या कंस्ट्रक्शन होने वाला है, कौन सी इंडस्ट्री आएगी और क्या हो रहा है।  आप इसका हिसाब लगा लें, तो आकलन करना सबके लिए आसान है कि रोड बनेगी तो इतने कंस्ट्रक्शन वर्कर चाहिए, पॉवर प्लांट लगेगा तो इतने इंजीनियर चाहिए। इतने टेक्नीशियन चाहिए, पानी की लाइन बिछेगी तो इतने प्लमबर चाहिए। हम अगर अपनी वोकेशनल ट्रेनिंग का जरूरत की पहचान कर लें तो शायद हम बहुत आगे बढ़ सकते हैं। वो हमने नहीं किया है। 


मुख्यमंत्री जी के साथ हमने प्रयास भी किया था। यहां एक टीम भी आई थी टाटा स्ट्राइव्स की, स्किल डेवलपमेंट सचिव खुद आए थे आप लोगों से चर्चा करने के लिए लेकिन एक ही बात वहां पर यह हुई थी कि जिलों के हम विकास के प्लान बनाएंगे। आईटीआई में जो लोग पढ़ाते हैं, उनके पास क्या वो स्किल हैं कि जो हमें अपने लोगों को पलायन से रोकने के लिए सिखाने चाहिए। उस मामले में हमारे जो आईटीआई के प्रिंसिपल और टीचर हैं, क्या हम उनका कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम बना सकते हैं। 


आज उत्तराखंड को बने 17 साल हो गए हैं, हम सीएम साहब से बात कर रहे थे कि 2020 में आपको राज्य बने 20 साल हो जाएंगे, तो क्या ऐसा कोई विजन डॉक्यूमेंट है, जिसे हम जारी कर कहेंगे कि ये हमारा विजन 2020 है। उसको हम तीन साल के अंदर सबके साथ मिलकर हासिल कर सकेंगे। मेरे ख्याल से यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। अगर हम बस मापदंड कर लें, खाका खींच लें तो हासिल तो कर ही लेंगे। 

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