आज का ये जो कार्यक्रम यहां हो रहा है उसका टाइटल जो है, वह गढ़वाली में है। इसलिए लोगों को थोड़ा आग्रह है कि गढ़वाली से इसकी शुरूआत की जाए। आज जब राज्य का 17 साल पूरे हो रहे हैं, इस अवसर पर हमारे जो उत्तराखंड के रत्न हैं, जो चाहे देश की सुरक्षा में हों या सिविल सेवा हो, प्रशासनिक सेवा हो, उसमें आज अपना महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। ऐसे हमारे बीच आए हुए डीजी कोस्टगार्ड और देहरादून जनपद के रहने वाले राजेंद्र सिंह जी, प्रधानमंत्री के सचिव श्री भास्कर खुल्बे जी, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन जिन्होंने बहुत यश कमाया, प्रसिद्धि पाई, ऐसे अश्वनी लोहानी जी, उत्तराखंड के पलायन आयोग के उपाध्यक्ष और इससे पहले भारत सरकार में डीजी फॉरेस्ट रहे एसएस नेगी जी, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव आलोक डिमरी जी, हमारे बीच में मंत्री व छोटे भाई धन सिंह रावत जी, मुख्य सचिव उत्पल कुमार जी और डीजी पुलिस अनिल रतूड़ी जी, पर्यावरण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले पद्मश्री अनिल जोशी जी, देश के सबसे बड़े दानदाता हंस फाउंडेशन के मनोज भार्गव जी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव और इन सभी फूलों को एक माला में पिरोने की कोशिश करने वाले आजतक के वरिष्ठ पत्रकार मंजीत नेगी जी…।
आज जब उत्तराखंड राज्य 18वें साल में प्रवेश करने जा रहा है, इस मौके पर हम सब इकट्ठा होकर, जिसे कहते हैं एकजुट होकर-एकमुठ होकर उत्तराखंड राज्य के विकास के बारे में सोचें। मुझे आज बहुत प्रसन्नता है कि आप सब लोग यहां आए। हमारे राज्य के जो विशिष्ट लोग हैं और जो अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, चाहे ब्यूरोक्रेसी हो, एग्रीकल्चर हो या किसी अन्य क्षेत्र में हों, हमारे कुछ छात्र भी यहां हैं, कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी यहां हैं, हम सब राज्य के लिए यहां एकत्रित हुए हैं, इसके लिए मैं आप सबको बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
मुझे आज बहुत खुशी हो रही है, राज्य को 17 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। तरुण से हम युवा होने जा रहे हैं। उत्तराखंड की जो तमाम विभूतियां हैं, कुछ लोगों ने पहले सेवाएं दीं, अब भी वो सेवाएं दे रहे हैं, और कुछ लोग वर्तमान में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर हैं, जो रैबार कार्यक्रम आज आयोजित किया जा रहा है, रैबार का अर्थ होता है संदेश। इस रैबार का मकसद है कि जिस धरती पर हमने जन्म लिया, जहां पर हम पले बढ़े, और जहां पर पैर रखकर हम इतना ऊंचा पहुंचे हैं, ये सब हमको देख रही है। हमको निहार रही है। हम राज्य के लिए क्या योगदान कर सकते हैं, ये इस रैबार कार्यक्रम का प्रायोजन है। ये आज हमारे लिए बेहद खुशी की बात है कि देश की तमाम महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं और जो सुरक्षा की जिम्मेदारियां हैं, आज देश ने उत्तराखंड के ऊपर विश्वास किया है। चाहे अजीत डोभाल जी के रूप में हों, जनरल बिपिन रावत जी के रूप में हों, राजेंद्र सिंह जी के रूप में हों, आज अश्वनी लोहानी जो, भास्कर खुल्बे जी को प्रधानमंत्री जी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं, मैं ये मानता हूं ये देश का उत्तराखंड के ऊपर विश्वास है, और हमको उस विश्वास को बनाकर रखना है।
बहनों, भाइयों, कुछ बातें मैं संक्षिप्त में कहना चाहूंगा। हमको सात महीने होने जा रहे हैं, सात महीने की जो हमारी पहली और महत्वपूर्ण सफलता मानता हूं कि हमने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मजबूत शुरूआत की है। चाहे ऊधमसिंह नगर का एनएच-74 से जुड़ा मसला हो, चाहे गरीबों के खाद्यान्न से जुड़ा मसला हो, या समाज कल्याण विभाग में गरीबों से संबंधित सभी मसले हों, हमारे प्रधानमंत्री का जो फोकस है, वह भारत को 2022 तक गरीबी से मुक्ति का है, और इसलिए राज्य सरकार ने भी स्वाभाविक रूप से उस पर ठोस पहल की है। हमने कुछ लोगों पर कार्रवाई भी की है और आने वाले समय में हम कुछ लोगों पर पहुंच भी रहे हैं, कुछ लोग भाग रहे हैं, उनको परेशानी हो रही है, लेकिन हमें उन लोगों की परेशानी की कोई चिंता नहीं है, हमारा ये काम चलता रहेगा।
उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है, जहां पुलिस में मैंने देखा, जब मैं अधिकारियों से मिला, एक कंपलसिव करप्शन होता है, थानों में कुछ जाता नहीं है, कोई आर्थिक मदद होती नहीं है, खर्चे इतने होते हैं, जब समीक्षा के दौरान बैठक हुई, कुछ अधिकारियों से अलग से बैठक हुई तो ये चीज सामने आई। हमने इस राज्य में थाना विशेष सहायता निधि शुरू की है। जो सीधे थानों को जाएगा और जितना हमारे विभाग ने मांगा, उतना दिया है। उसमें कोई कटौती नहीं की। कमी रखी होगी तो विभाग ने रखी होगी, हमने कोई कमी नहीं रखी। हम चाहते हैं कि सुधार होना चाहिए और जो ये कंपलसिव करप्शन है, उसमें शासन-सरकार की भूमिका कैसी होनी चाहिए, हमने इसकी शुरूआत की है। गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में हम जनता से संवाद लगातार बनाए हुए हैं। मैं जिस भी जिले में जाता हूं, मेरा पहला कार्यक्रम जनता से संवाद का होता है, जो दो घंटे-ढाई घंटे या कभी-कभी इससे अधिक भी चलता है। देहरादून में भी मैं सप्ताह में एक दिन लोगों से मिलता हूं, वैसे दो घंटे रोज मिलने का कार्यक्रम रहता है।
जनता से सीधा संवाद हम लोग कर रहे हैं। चाहे शिक्षक हों, शिक्षक दिवस पर साढ़े तीन हजार शिक्षकों से हमने सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों से हमने सीधा संवाद किया है। 1905 हमने एक टोल फ्री नंबर दिया है, जिसमें कोई भी सुझाव देना हो अथवा शिकायत करनी हो, इस नंबर पर कर सकते हैं। आपकी आवाज में वह रिकॉर्ड हो जाएगा, वह संबंधित विभाग को भेज दिया जाएगा और दस दिन में विभाग को उसमें अपनी टिप्पणी देनी होगी। इसी तरह से जो सेवा का अधिकार अधिनियम है, उसमें डेढ़ सौ से अधिक सेवाएं राज्य में थीं, 162 सेवाएं उसमें हमने और जोड़ी हैं। लगभग ये 362 सेवाएं सेवा के अधिकार में जुड़ी हैं। इसी तरह से डिजिटल इंडिया का जो प्रधानमंत्री जी का सपना है, हमने पूरे सचिवालय को, ब्लॉक मुख्यालयों को, जिला मुख्यालयों को बॉयोमेट्रिक किया है। हम और नीचे तक जा रहे हैं। कहीं कहीं हमारे जिला अधिकारियों ने सीसीटीवी भी लगाए हैं।
हमारा केवल इतना प्रयास है कि लोग समय से आएं, समय पर जाएं और उनके आने-जाने का समय रिकॉर्ड में रहे। यह हमने एक प्रयास किया और आज हम ब्लॉक लेवल तक उसमें पहुंच चुके हैं। कृषि उर्वरक डीबीटी, उत्तराखंड देश के उन पांच राज्यों में है, जो कृषि उर्वरक की सब्सिडी सीधे किसान के खाते में पहुंचा रहा है। दो कमियां हमारे राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में थीं, कहते हैं कि आज पृथ्वी एक प्लास्टिक ग्रह के रूप में तब्दील होती जा रही है। इतना प्लास्टिक इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन उससे संबंधित कोई भी संस्थान हमारे पास नहीं था। इन छह महीनों में, हमने वह सफलता अर्जित की है और मकर संक्रांति पर हमारी सीपीएड की क्लासेज शुरू हो जाएंगी, यह तय हो गया है। इसी तरह से एनआईएफटी की कमी थी। उत्तराखंड में पर्याप्त मात्रा में रेशा भी है, हमारे पर बहुत सृजनशील बच्चे हैं, हजारों बच्चे यहां से हर वर्ष देश के विभिन्न फैशन डिजाइनिंग संस्थानों में जाते हैं। उनके लिए हम एनआईएफटी कर पाए हैं, उसके लिए भूमि की भी व्यवस्था हो गई है, धन की व्यवस्था भी की जा रही है, बहुत जल्दी इसका निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। ये दो संस्थान जिनकी हमें लगता था कि हमारे पर कमी है, उसे हम दूर कर पाए हैं। इसी तरह से तीसरा जो
हमारा महत्वपूर्ण काम होने जा रहा है, उसके लिए मैं दिल्ली में मिला भी था संबंधित लोगों से, मुझे लगता है कि वह जल्दी ही हो जाएगा, वह है कनवेंशन सेंटर का। यह भारत में अपनी तरह का सबसे अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेंटर होगा।
ऋषिकेश में गंगाजी के किनारे जो आईडीपीएल की भूमि है, उसके हस्तांतरण की बात चल रही है और लगभग-लगभग बात बन गई है। कृषि के क्षेत्र में हमारे जो मैदानी भाग है, उनमें तो चकबंदी थी लेकिन जो हमारे पर्वतीय क्षेत्र हैं, वे चकबंदी से वंचित थे। मैं तो कहूंगा कि किन्हीं कारणों से उन्हें चकबंदी से वंचित किया गया। यह पर्वतीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार है और मैं समझता हूं कि यह गेमचेंजर साबित होगा हमारी पहाड़ी खेती के लिए। इसकी हमने शुरूआत की है। हमने तय किया है कि यह मुख्यमंत्री के गांव से शुरू होना चाहिए। हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, उनके गांव के लिए भी नोटिफिकेशन होने जा रहा है, हमारे वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज, उनके गांव में प्रक्रिया चल रही है, वहां टीम जा चुकी है। हमारे कृषि मंत्री हैं, उनके गांव में यह हो रहा है। क्योंकि हमारा सोचना है कि इसकी शुरूआत अपने घर से होनी चाहिए। चकबंदी के अलावा हमने एक क्लस्टर अप्रोच अपनाई है। हमें नहीं लगता कि पहाड़ों में धान की खेती, गेहूं की खेती बहुत लाभकारी है। यह हमारी जरूरत की पूर्ति करती होगी लेकिन हम उसे आय का साधन बनाना चाहें, तो वह स्थिति नहीं है। इसलिए हमने बेमौसमी फल-फूल सब्जियां और सगंध खेती तथा चाय की खेती पर ध्यान केंद्रित किया है। चाय की खेती में बेतहाशा रोजगार है। जहां भी हमारे राज्य में चाय की खेती प्रारंभ हुई है, बहुत अच्छी फसल वह दे रही है। इसलिए चाय की खेती पर हमारा विशेष फोकस है।
इसके साथ ही चमोली जनपद का अंतिम गांव है हिमनी..। ये घेस गांव सभी थी…। पहले कहते थे घेस से आगे नहीं देश…। अब घेस गांव की दो ग्रामसभाएं हो गई हैं, एक घेस हो गई है और एक हिमनी है। तो अब घेस थोड़ा पहले हो गया है और हिमनी बॉर्डर गांव हो गया है। तो साढ़े आठ हजार फीट की ऊंचाई पर उस गांव में हमने वहां के किसानों से कहा था कि आप मटर की खेती करिये। अगर आप ऐसा करेंगे तो पहली फसल तुड़ाई के लिए मैं खुद आपके गांव आऊंगा। मुझे खुशी है कि जब हमने वहां से किया था तो पहली बार में साढ़े सात लाख का मटर वहां से बिका था। तीस रुपये प्रति किलो मटर वहां से उठा था। इस बार हमने 22 गांवों में यह प्रयोग किया है और तीन गांवों में सघन खेती की है। अनुमान है कि इस बार 75 लाख से अधिक का मटर इन गांवों में बिकेगा। मैं स्वयं वहां पर गया और 50 रुपये किलो मटर वहां गांवों से उठ रही है। वहां के लोग बहुत खुश हैं, मूल रूप से वहां के लोग आलू की खेती करते थे। मटर की खेती में 10 गुना फायदा है। फिर उसका जो घास है, वह जानवरों के लिए बहुत पौष्टिक है। उससे दूध की मात्रा बढ़ती है। साथ ही मटर के पौधे की जड़ों से नाइट्रोजन मिलता है भूमि को। इस तरह से भूमि के लिए भी, पशुओं के लिए भी और एक अच्छी आर्गेनिक सब्जी की पैदावार वहां हो रही है। इसलिए हमने तय किया है कि हम 50-50 हेक्टेयर के क्लस्टर बेस बनाकर वहां काम करेंगे। चिकित्सा के क्षेत्र में हम चाहते हैं कि ज्यादा काम हो।
स्वास्थ्य हमेशा से मेरा विषय रहा है। मैंने उत्तराखंड के हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर बहुत लड़ाई लड़ी है। मैं सुप्रीम कोर्ट तक गया हूं। लेकिन आज में अपने आप को बहुत मजबूर पाता हूं। हम बहुत प्रयास कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि कहीं से डॉक्टर आएं। लेकिन जितनी हमें जरूरत है, उतने हम डॉक्टर हासिल नहीं कर पाए हैं। हमने तो अपने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से भी कहा था कि हमारा जो श्रीनगर मेडिकल कॉलेज है, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज है, एक हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति है। अगर सेना उसे संचालित करने के लिए तैयार है तो हम उन्हें वह देने के लिए तैयार हैं। उसमें काफी हद तक प्रयास हुए हैं। प्रयास अभी जारी भी हैं। मुझे लगता है कि अगर वह हो जाएगा तो उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए, सैनिक बहुल राज्य के लिए और बड़ी संख्या में हमारी सेना सीमा पर तैनात है, इतनी ऊंचाई पर सेना के पास कोई भी ऐसा संस्थान नहीं है। ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जो बीमारियां होती हैं, उनके लिए डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। तो हमारा अल्मोडा कॉलेज, श्रीनगर कॉलेज इसमें हो सकता है। हमारे पर जो 15-16 प्रतिशत सैनिक, पूर्व सैनिक, अर्धसैनिक बल हैं, उनको भी यहां पर सामान्य लोगों के साथ एक विशेष सुविधा भी दी जा सकती है।
इसके साथ ही हम 10 तारीख से पौड़ी जिला अस्पताल से टेलीमेडिसन की शुरूआत करेंगे और जैसे-जैसे कनेक्टिविटी दुरुस्त होती जाएगी, हम उसे आगे बढ़ाएंगे। हम चाहेंगे कि दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां भी हमारे पास कनेक्टिविटी होगी, वहां से हम इसकी शुरूआत करेंगे। इससे लोगों को जो हम स्वास्थ्य की सेवाएं देना चाहेंगे, दे पाएंगे। अभी तक हमारे किसी भी जिला अस्पताल में आईसीयू नहीं थे। जब हमारी सरकार के छह महीने पूरे हुए तो हमने यह फैसला किया कि हम जिला अस्पतालों में दो आईसीयू यानी चार बेड हम बनाएंगे। हमने तीन महीने का लक्ष्य रखा है, उसमें हंस फाउंडेशन ने भी हमें मदद दी है। वह तो इसे स्वयं बनाना चाहते थे लेकिन हमने कहा कि आप हमें कॉर्पस फंड दे दीजिए, दिक्कत यह होती है कि बन तो जाता है लेकिन उसकी मेंटीनेंस नहीं होती है, उन्होंने इसके लिए सहमति दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि तीन अस्पताल में वे खुद इसे बनाएंगे। तो नौ में हम बनाएंगे, तीन में वह बनाएंगे। धीरे-धीरे हमारी 26 अस्पतालों में आईसीयू बनाने की योजना है। इसी के साथ ग्रामीण इलाकों में खुले से शौच मुक्त होने में उत्तराखंड देश का चैथा राज्य बना है।
इसके साथ ही हमारा लक्ष्य है कि मार्च तक हम शहरी क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कर देंगे। 2019 तक हर घर को बिजली देंगे, 100 फीसदी साक्षरता हमारा लक्ष्य है। 2022 तक सबको आवास, जो प्रधानमंत्री जी ने जो कल्पना की है, तब जब देश की आजादी को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं तो एक नया भारत तैयार हो। गरीबी से मुक्त भारत, जहां सबके पास अपने घर हों, बिजली हो, पानी हो, सभी शिक्षित हों, उस भारत को बनाने के लिए हमने भी 2022 तक का लक्ष्य रखा है।
हमारी कोशिश होगी कि सबको आवास का लक्ष्य हम 2021 तक हासिल कर लें। उसके लिए हमने सिंगल विंडो सिस्टम किया है। इंडस्ट्री में भी हमने सिंगल विंडो सिस्टम किया है। परिवहन में हमने लक्ष्य से 12 करोड़ ज्यादा राजस्व प्राप्त किया है। इसी तरह से ऊर्जा में भी हमने पहली छमाही में 72 करोड़ अधिक का राजस्व प्राप्त किया है। परिवहन में देखें तो हमने पिछले वर्ष के मुकाबले कुल 53 करोड़ रुपये ज्यादा राजस्व प्राप्त किया है। इसमें प्रधानमंत्री ने हमें जो रास्ता दिखाया है, भ्रष्टाचार मुक्त रहने का उससे संभव हुआ है।












