Home Raibaar Summit एक ऐसे उत्तराखंड के लिए रैबार, जहां सर्वमत से हों फैसले
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एक ऐसे उत्तराखंड के लिए रैबार, जहां सर्वमत से हों फैसले

राजेंद्र सिंह, पूर्व महानिदेशक, भारतीय कोस्ट गार्ड

आज जरूरत इस बात की है कि कैसे हम अपनी मातृभूमि से वापस जुड़ सकें। इसके लिए हम सब यहां आए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह ने हर उत्तराखंडी को आमंत्रित किया है कि आवा आपुण घौर। जहां-जहां भी उत्तराखंडी हैं, देश में, विदेश में, आइए और अपने विचारों से हमें प्रेरित कीजिए।  हम कोशिश करेंगे कि आपके विचारों से हम आपके सपनों का उत्तराखंड सही मायनों में बना सकें।

हम लोगों की कोशिश है कि अपने विचारों, कथनी और करनी में, सोच में जैसे उत्तराखंड की कल्पना करते हैं, वैसा ही हम बनाएं। मैंने अपने लिए एक ऐसा उत्तराखंड का सपना देखा है, जिसमें युवाओं, प्रतिभावानों तथा तकनीक की उच्च भागीदारी हो। समाज का अंतिम व्यक्ति भी महसूस करे कि यह उसका अपना प्रदेश है और इसके निर्माण में उसका योगदान है।

मैं ऐसे उत्तराखंड की कल्पना करूंगा जहां सर्वमत से निर्णय लिए जाएं तथा जिसमें महिलाओं, बेटियों की उत्कृष्ट भागीदारी हो। समृद्ध विकास हो, जहां भेदभाव, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, पलायन का कोई स्थान न हो। ऐसा प्रदेश जिसका प्रत्येक व्यक्ति और स्थान अपने शिष्टाचार और सुंदरता से देवभूमि को गौरवान्वित करे जिससे दूसरे राज्य और देश इसका अभिनंदन और नमन करे। यह है मेरे सपनों का उत्तराखंड- श्रेष्ठ, सुंदर और पवित्र।

आप सब लोग एक ऐसे उत्तराखंड की कल्पना करें और रोज आधा घंटा भी इस बारे में सोचें कि कैसे अपने राज्य को आगे बढ़ाना है। अगर ऐसी सोच बन जाती है तो एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी। देवों ने अगर अपनी भूमि देवभूमि कहलाने का हक दिया है तो वह सिर्फ उत्तराखंड के लोगों को दिया है। चारधाम, हरि की नगरी हरिद्वार, ऋषियों की कर्मभूमि ऋषिकेश, गुरु द्रोण की नगरी देहरादून, कौरवों का लाक्षागृह, अशोक की शिला भी हमारे पास हैं। जहां एक ओर गंगा-यमुना हमारे पास है तो हेमकुंड में गुरु गोबिंद सिंह भी विराजमान हुए थे। एक ओर फूलों की घाटी हमारे पास है, दूसरी ओर जिम कॉर्बेट पार्क भी है। जरूरत है तो सिर्फ साथ मिलने और एक साथ काम करने की। संस्कृत में भी कहा गया है कि जिस प्रकार से रथ का एक पहिया अकेला नहीं चलता, उसी प्रकार से पुरुष अपने भाग्य के भरोसे नहीं बैठ सकता, पुरुषार्थ भी करना पड़ता है। मेरे ख्याल से उत्तराखंड भाग्यशाली है और सिर्फ जरूरत है कि हम लोग जो बाहर हैं, थोड़ा पुरुषार्थ करें और आएं तो उत्तराखंड को और अच्छा बना सकते हैं।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो नारा दिया है- आवा आपुण घौर। अभी हमारे दिल्ली में 18 लाख प्रवासी, मुंबई में 10 लाख, लखनऊ में 6 लाख हमारे उत्तराखंडी लोग हैं। जिस भी भाषा जौनसार, टिहरी-गढवाल, कुमांयू की भाषा में आपको कहना है कहिए लेकिन अगर सूबे के मुखिया ने हमें अपने घर बुलाया है तो हमारा कर्तव्य बनता है कि अपने-अपने घर जाएं और अपने उत्तराखंड से जुड़ें।

जागर से देवों का आह्वान
रैबार 2 के दूसरे सत्र की शुरुआत से पहले उत्तराखंड की मशहूर जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट और उनकी टीम ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति वैदिक मांगल गीतों पर आधारित थी। इसके बाद मां गंगा की स्तुति की गई। ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलने के बाद शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया। इसी पर केंद्रित थी बसंती बिष्ट की प्रस्तुति। बोल थे – जय जय गंगे मइया…जय जय उत्तराखंडे। हिमालय की देवियों को आमंत्रित करते हुए गाए जाने वाले गीत को जब बसंती जी ने गाया तो तो श्रोता और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी भावविभोर हो गए। रैबार 2 में आए कई मेहमान अपने मोबाइल से इस पारंपरिक गीत को रिकॉर्ड करते रहे। 

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