Home Raibaar Summit रिटायरमेंट के बाद यहीं रहूंगा, अपनों के लिए कुछ करूंगा
Raibaar Summit

रिटायरमेंट के बाद यहीं रहूंगा, अपनों के लिए कुछ करूंगा

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट, सैन्य सचिव

रैबार कार्यक्रम में आने पर मुझे अत्यंत गर्व है। मैं सबका शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसा मौका दिया गया। जब मुझे बताया गया कि कुछ शब्द बोलने पड़ेंगे तो मैं कल भारतीय सेना की दो प्रमुख रेजीमेंट गढ़वाल और कुमांऊ रेजीमेंट के इतिहास को देखने लगा। उसमें 1947 से पहले गढ़वाल रेजीमेंट के इतिहास में एक अंग्रेज ने लिखा है कि ये लोग पारंपरिक तौर पर ही सिपाही हैं। इनके खून में वीरता, ईमानदारी और मेहनत बहती है और आज मैं भगवान से गंगा जी के किनारे बैठकर यही कहूंगा कि हमारे लोगों को, हम सभी को भगवान ने देवभूमि में रहने का, अपने अंदर उन गुणों के होने का जो आर्शीवाद दिया है वो हमारे अंदर और हमारी पीढ़ियों के अंदर रहे।

अगर हम यह विचार करें कि उत्तराखंड की उन्नति कैसे होनी है, जब मैं स्कूल से निकलकर सीधा ट्रेनिंग के लिए सेना में गया तो उस समय शायद जिन प्रोफेशन में जा सकते थे और उनमें एक सेना था और आज उत्तराखंड के वासी हरेक प्रोफेशन में हैं। आप कल्पना कीजिए कि 40 साल पहले हम कहां थे और आज कहा हैं। यह सब हम लोगों और हमारे पूर्वजों की ईमानदारी की वजह से हुआ है।

मैं आज भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में आप सबके सामने खड़ा हूं। मुझे, हमारे सिपाहियों को, हमारे वीरों को, हमारे वीरों की पत्नियों को हमारे राज्य ने, हमारे लोगों ने जो इज्जत दी है उसके लिए मैं मुख्यमंत्री, उनके सहयोगियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। मैं जून 2020 में सेवानिवृत हो रहा हूं और मैं भी सेवानिवृति के बाद मसूरी में ही रहूंगा। और जो भी मैं अपने लोगों के लिए कर सकूंगा उसकी पूरी कोशिश करूंगा।

अच्छे व्यक्तियों के अलावा, दो चीजें भगवान ने हमारे पास दे रखी हैं। वह है यहां का वातावरण और यहां की जमीन। सबसे ज्यादा स्कोप मेरे ख्याल से टूरिज्म डेवलप करने में है। दूसरा आज मैं अपने मित्र भूपेंद्र कैंथोला की तरफ से मुख्यमंत्री जी से निवेदन करूंगा कि एफटीआईआई की एक शाखा, इस उत्तराखंड में बन सकती है। उसमें अगर आपका सहयोग रहे तो कैंथोला जी जरूर इसको आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

मैं आपको अपने परिवार और सेना की तरफ से बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं। जय हिंद।

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