डॉ. मधुबाला, निदेशक, डिबेर
यह एक बहुत संजीदा अवसर है, हम अपनी पीढ़ी को घर बुलाने का एक आह्वान कर रहे हैं। डीआरडीओ का रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डिबेर) पलायन से कैसे जुड़ा है, मैं आपको यह बताना चाहती हूं, क्योंकि जब हम सीमांत क्षेत्रों को देखते हैं कि गांव के गांव खाली हो रहे हैं तो यह अपने आप में एक रक्षा चुनौती है। तो हमने सोचा कि जो कृषि की टेक्नोलोजी है, उनको सीमांत क्षेत्रों में छोटे किसानों को जोड़ा जाए। हमने एक स्टडी शुरू की, उसके आधार पर मैं सिर्फ आपको तीन बिंदुओं पर विचार करने को कहूंगी।
हमने प्रोगेसिव किसानों से पता लगाया कि मात्र दो हजार से पांच हजार के लिए हमारा युवा वर्ग दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली या अन्य शहरों में काम करने के लिए चले जाता है, क्योंकि उनकी यहां पर इनकम उतनी नहीं है। जब हमने पता लगाया कि कृषि या एग्रीकल्चर में उतनी आय क्यों नहीं है तो पता चला कि उनके पास वैज्ञानिक तरीके नहीं हैं। हमारे पास केस स्टडी हैं। हमने डॉक्यूमेंट्री द्वारा वैज्ञानिक तरीके से कृषि करते हुए दिखाया।
केवल देसी सब्जियां ही नहीं बल्कि विदेशी सब्जियों जैसे पाक कैबेज, रेड कैबेज, चाइनीज कैबेज के उत्पादन उनकी इनकम दो वर्ष के अंदर ही दोगुनी और उससे ज्यादा हुई है। इसका डाटा भी उपलब्ध है। दूसरा बिंदु उस युवा वर्ग के लिए है जो ब्लू कालर जाब से जुड़ना चाहता है लेकिन कृषि से जुड़ता नहीं हैं। उनके पास उतनी जमीन नहीं है मान लीजिए कि उनके पास आधी नाली जमीन है उनके लिए हाइड्रो टेक्नीक एक ऐसी तकनीक है जिसकी सब्जियां तीन गुना ज्यादा रेट में बिकती हैं इन सब्जियों को लोग बड़े चाव से लेते हैं।
यह हमारे संस्थान की एक बड़ी उन्नत तकनीक है जिसे नासा के लोगों ने भी अपनाया और हमने इसे अंर्टाकटिका में भी दिखाया और हमने सीडीओ पिथौरागढ़ के साथ जुड़कर इसका प्रचार किसानों में भी किया। लोगों का थोड़ा पढ़ालिखा होना भी बहुत आवश्यक है क्योंकि इसको हम ई-मार्केटिंग करके और भी बढ़ा सकते हैं। इससे यहीं पर रहकर लोग बहुत अच्छा काम कर सकते हैं।
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तीसरा बिंदु मैं औषधीय खेती के बारे में कहना चाहती हूं। डिबेर की एक टेक्नोलोजी जो ल्यूगोसकिन है इसने बड़ी धूम मचा रखी है। डब्ल्यूएचओ की एक ड्रग है ल्यूकोडर्मा के लिए। ऐसी औषधियां उगाई जाएं जिसकी मार्केट पहले से उपलब्ध है तो अचानक ही उनकी इनकम बढ़ेगी। एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है जो हमने देखा है पहाड़ों के कटान के साथ।
सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा है इसके लिए पहाड़ों के कटान की आवश्यकता है परंतु ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊपरी सतह की मृदा गायब होती जा रही है तो हमने नेशनल हाइवे 125 पर बॉर्डर रोड़ आर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर एक प्रयोग किया और वहां पर हमने एक ऐसी घास और जड़ी बूटियां लगाई जिससे मृदा का क्षरण रूक गया। अगर यह प्रोजेक्ट पूरे राज्य में ले लिया जाए तो छोटे-छोटे लोग हैं, जो कम शिक्षित हैं, वह इसमें काम कर सकते हैं इससे उन्हें रोजगार मिलेगा और इससे राज्य की भी उन्नति होगी।












