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मातृभाषा को भी जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस नेगी, स्ट्रैटिजिक फोर्सेस कमांड

यह एक देवभूमि है और एक सैनिक होने के नाते मैं गर्व से कहता हूं कि यह एक वीर भूमि भी है। हमारे सैनिकों ने सभी युद्धों में अपनी वीरता दिखाई और देश के लिए अपनी कुर्बानियां दी हैं। मेरी पैदाइश चमोली के उतरों गांव की है।  मेरी शुरुआती शिक्षा गांव में हुई। हम उस समय के लोग हैं जब हमने पाटी, कमेडू और बुलख्या से पढ़ना लिखना सीखा। उस समय मार्डन शिक्षा का अभाव था, इसलिए मुझे बाहर जाकर पढ़ना पड़ा। मैंने 1981 में नेशनल डिफेंस एकेडमी से कमीशन प्राप्त किया।

आज सुबह ही कई चीजें सामने आई हैं कि कहां ध्यान दिया जाना है। मैं समझता हूं कि मुख्य तौर पर हमारी शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि हमारा राज्य एक नया राज्य है और उन्नति के रास्ते पर यह अग्रसर है, इसमें कुछ समय लगेगा। पहले के मुकाबले अब शिक्षा में काफी सुधार हुआ है और अभी जो मार्डन तरीका है उसे भी अपनाने की जरूरत है। दूसरा बेराजगारी भी एक बड़ी समस्या है आज कई स्कीमें बताई गई हैं। मुख्यमंत्री जी ने भी कुछ नई चीजों के बारे में बताया, जिनसे रोजगार पैदा रहा रहा है।

एक बात मैं स्वास्थ्य के बारे में कहना चाहता हूं कि इसमें सुधार करने की बहुत जरूरत है। मैं समझता हूं कि दो-तीन गांवों के बीच में एक छोटी डिस्पेनसरी होनी चाहिए ताकि लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर-दूर नहीं जाना प़ड़े। कई जगहों पर सड़क के अभाव के कारण मरीजों को कंडी पर ले जाना पड़ता है। एक बात और है, प्रकृति ने हमारे राज्य को बहुत सारी चीजें दे रखी हैं।

प्राकृतिक तौर पर हमारे यहां बहुत सारी फलों को उत्पादन होता है लेकिन इनको मॉर्केट नहीं मिल पाने के कारण यह सही जगहों तक नहीं पहुंच पाती हैं। मेरा एक सुझाव है कि एक कॉटेज इंडस्ट्री जिसमें कि हमारे एग्रीकल्चर उत्पादन, ऊन हों या फिर फलों को रखा जाए। मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि देवभूमि की जो मातृभाषा है उसको भी हमने जीवित रखना है। हम सब लोग अपनी भाषा में बात करें और अपने बच्चों को भी अपनी मातृभाषा सिखाएं।

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