पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
रैबार के जरिये हम सभी को मां गंगा के इस पावन तट पर एकत्र होने का अवसर मिला है। देवभूमि के विकास की संभावनाओं पर मंथन करने के लिए हम सब यहां हैं। यहां पर एक से एक विषयों के विशेषज्ञ पहुंचे हैं, उनको सुनकर निश्चित रूप से ज्ञानवर्धन होता है। यह विषय मेरी रुचि के विषय हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस प्रकार का कार्यक्रम हम बहुत पहले से एक संस्था के माध्यम से करते थे और अब सरकार के माध्यम से भी बोधिसत्व कार्यक्रम चला रहे हैं, इसमें विचारों की श्रृंखला आयोजित करते हैं।
अभी तक इसमें हम चार श्रृखंला आयोजित कर चुके हैं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाले, जिन्होंने हमारे उत्तराखंड का गौरव बढ़ाने का काम किया है, अपने-अपने क्षेत्रों में विशेषज्ञताएं प्राप्त की हैं, उन सभी को हमने ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से आमंत्रित किया है। कुछ दिन पहले ही उस कार्यक्रम की चौथी श्रृंखला हमने संपन्न की है।
उस श्रृंखला का भी उद्देश्य यही है कि सबके विचार आएं और विचार आने के बाद कैसे हमारा उत्तराखंड आत्मनिर्भर बने, कैसे हम सब एकमय होकर चलें, हमारे राज्य में भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, ऐसे में कैसे सामंजस्य बैठाया जाए और कैसे हम हर क्षेत्र में आगे बढें, इन सभी बातों पर लगातार हमरा मंथन चल रहा है। जब मैं राज्य के पहाड़ों की ओर देखता हूं तो मुझे एक आवाज, प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यह प्रतिध्वनि है साहस की, यह प्रतिध्वनि है ईमानदारी की, यह प्रतिध्वनि है विश्वास की, यह प्रतिध्वनि है दैवीय प्रकाश की।
सबसे पहले मैं उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता की ओर से, उत्तराखंड सरकार की ओर से देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मुझे आज भी विश्वास नहीं हो रहा है कि जनरल रावत अब हमारे बीच में नहीं है। जब रैबार की बात हो रही थी तो यही था कि कब उनका, हमारा सबका समय एक साथ हो। सब लोग एक साथ कार्यक्रम में उपस्थित होकर नई चीजों को खोजें, उसपर चिंतन मंथन करें, मंथन में से अमृत निकालें। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। व्यक्तिगत रूप से भी मेरे साथ उनका काफी लगाव था। जब हम लोग पहली बार मिले थे तब मुझे यह लगा ही नहीं कि वह इतने बड़े व्यक्ति हैं। उनके अंदर इतनी सादगी और सरलता थी।
मेरे पूज्य पिता की महार रेजीमेंट सागर में है तो इसी महीने हमारा वहां जाने का कार्यक्रम बना था। जनरल रावत के अंतिम संस्कार में, जब मैं यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बता रहा था तो मेरा गला भर गया, मुझे लगा मेरी आंख में आंसू आ जाएंगे। जब जनरल रावत मुझे मिले थे तब कह रहे थे कि मैं तुमको वार मेमोरियल लेकर जाऊंगा, वहां सैनिक परिवारों से मिलवाऊंगा, रात को हम लोग वहां बड़ा खाना आयोजित करेंगे। उसके बाद उन्होंने कहा कि चार कार्यक्रम उत्तराखंड में करेंगे। एक कुमाऊं रेजीमेंट रानीखेत में, एक लैंसडाउन में, एक कार्यक्रम देहरादून में और एक कार्यक्रम बनबसा कैंट में करेंगे। चारों जगहों पर सैनिकों, सैनिक परिवारों, पूर्व सैनिकों से मिलेंगे।
मेरी उनसे अंतिम मुलाकात नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस में राजभवन में हुई थी। मधुलिका जी और जनरल साहब साथ में आए थे। उसी दिन उन्होंने यह कार्यक्रम तय किया था। उसके बाद 14 नवंबर को गणेश जोशी जी के फ़ोन पर कॉल आया तो बड़ी लंबी बातचीत हुई। जब भी उनका जिक्र होता है तो मैं बड़ा भावुक हो जाता हूं।
जनरल बिपिन रावत को अपने अभिभावक की तरह ही मानता हूं। सबसे बड़ी बात यह थी कि हम उनसे कोई भी काम कहते थे तो उनमें इतनी जीवटता थी कि वह कहते थे अभी हो जाएगा। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। जनरल रावत ने हर तरह से हमारा संरक्षण और मार्गदर्शन किया।
जनरल बिपिन रावत के चले जाने से पूरे देश का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उत्तराखंड राज्य को बहुत क्षति हुई है। उत्तराखंड में हम सैन्यधाम बना रहे हैं और उस सैन्यधाम में टैंक से लेकर तमाम उपकरण आने थे। उन्होंने बिना देरी किए सारे उपकरण हमें उपलब्ध करवा दिए। हम संकल्प लेते हैं कि उनके बताए रास्ते पर चलेंगे और उनकी जो परिकल्पना थी उसके अनुरूप हम लोग काम करेंगे। यही हमारी उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
देश के जननायक पंडित अटल बिहारी वायपेयी के कारण उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ। अटल जी के जन्मदिवस को हम सुशासन दिवसके रूप में भी मानते हैं। ऐसी गवर्मेंट जो सबको न्याय देने का काम करे, सबको आगे ले जाने का काम करे, समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन पहुंचे, उसी परिकल्पना को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तराखंड के सपूत पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को हम नमन करते हैं। पिछले दिनों मैं बनारस गया था, वहां पर सुशासन, राज्यों को कैसे आगे बढ़ाया जाए, राज्यों को कैसे राजस्व की प्राप्ति हो, कैसे राज्य में अंतिम छोर पर बैठे हुए व्यक्ति तक शासन पहुंचे इन सब विषयों पर मुख्यमंत्री परिषद की बैठक थी। वहां पर होमस्टे पर हमने प्रजेंटेशन दी।
हमारे राज्य में पर्यटन, उद्यान, ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। बहुत सारी चीजें सबको पता हैं, लेकिन पता होने के बाद भी सभी चीजें धरातल पर कैसे उतरे, उसके लिए हम सबको काम करना है। अब चुनाव का वक़्त आ गया है। सभी राजनीतिक दल चुनाव की बात कर रहे हैं और हम 2025 की बात कर रहे हैं। हमारा यह एजेंडा अनवरत रूप से आगे चलने वाला है।
बोधिसत्व के माध्यम से हमने हर विभाग को रोडमैप बनाने को कहा है। ताकि यह पता हो कि हम किसी भी क्षेत्र में कैसे काम करें। उदाहरण के लिए, लंबे समय से उद्योगों और सरकार के बीच कई मामले अटके हुए थे। कुछ मामले ऐसे थे जिनमें विवाद की स्थिति थी। इन विवादों को सुलझाने के लिए हम वन टाइम सेटलमेंट की प्रक्रिया लेकर आएं हैं। जिस आधार पर भी उनका सेटलमेंट हो सकता है, उसके लिए हमने जज, अनुभवी वरिष्ठ नौकरशाह, बैंक अधिकारियों को मिलाकर एक कमेटी बनाई है। ताकि मामले निपट जाएं। पहले क्या होता था कि मामले निपटते नहीं थे, इधर से खींचतान, उधर से खींचतान लेकिन कमेटी बनने से मामले निपट जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि जो पुराने नियम-कानून बने हुए हैं, अगर वो सही नहीं हैं, व्यवहारिक नहीं हैं तो उन्हें खत्म करते जाइये, उनको किताबों में सजाकर मत रखिए। हम भी उसे पद्धति पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली ऐसी है कि वो तत्काल निर्णय लेते हैं। हम भी इसके आधार पर अपनी नीति बनाएंगे।
प्रधानमंत्री की कल्पना है कि जब उत्तराखंड 25 वर्ष का होगा, जब हम उत्तराखंड के राज्य स्थापना दिवस की सिल्वर जुबली मना रहे होंगे तब उत्तराखंड हर क्षेत्र में हिंदुस्तान का नंबर वन राज्य होगा। उसके लिए हम सबको इस प्रकार के कार्यक्रम, चिंतन मंथन, क्रियाकलाप करने होंगे। यह निश्चित रूप से होगा, इसलिए नहीं कि मैं कह रहा हूं या मंच पर बैठे लोगों का यह विचार है, यह यात्रा एक करोड़ 25 लाख लोगों की है। यह सामूहिक यात्रा है और यह अपने गंतव्य तक तभी पहुंचेगी जब सब लोग एक साथ मिलकर इस यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
आज प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश को एक सूत्र में बांध रहे हैं। आदि गुरु शंकराचार्य के बाद इस हिंदुस्तान में कोई नेतृत्व करने आएं हैं, वो नरेंद्र मोदी हैं। केदारनाथ में जो पुनर्निर्माण कार्य हुआ है वो सैंकड़ों वर्षों में किसी ने नहीं सोचा था। आज केदारनाथ में 400 करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास हो चुका है। आदि गुरु शंकराचार्य की वहां पर प्रतिमा स्थापित हो चुकी है। उनकी वहां समाधि बन गई है। केदारनाथ में सरस्वती घाट बन गए हैं, तीर्थपुरोहितों के आवास बन रहे हैं, अस्थापथ बन रहा है।
मैं मुख्यमंत्री परिषद की बैठक के लिए बनारस गया। मैं इससे पहले बनारस साल 2002 में गया था। उस समय काशी विश्वनाथ जाने के लिए एक संकरा सा रास्ता होता था। अगर कोई भक्त भगवान विश्वनाथ को जल अर्पित करना चाहता था तो वह गंगा जल लाकर भगवान पर अर्पित भी नहीं कर पाता था क्योंकि रास्ता ही नहीं था। अब काशी विश्वनाथ अद्भुत, अलौकिक बन गया है। तब 2-4 लोगों के लिए जाने का रास्ता नहीं था अब एक साथ 500 लोग गंगा जी से जल लाकर भगवान को अर्पित कर सकते हैं।
इस प्रकार का परिवर्तन रानी अहिल्या बाई होल्कर के बाद साढ़े तीन सौ वर्षों में किसी ने किया है तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है। उसके बाद मैं जब अयोध्या गया तो वहां देखा कि कितना बड़ा परिसर बन रहा है। वहां 40 मीटर नीचे तक खोदा जा रहा है। राम मंदिर ऐसा स्थल बन रहा है कि वो पूरी दुनिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक होगा।
केदारनाथ, बाबाविश्वनाथ परिसर, राम मंदिर को भव्य बना दिया गया है। अब बद्रीनाथ धाम को भव्य बनाने के लिए हमारी सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर दिया है। इसके लिए हमें 250 करोड़ रुपये स्वीकृत हो गए हैं। वहां पर भवन, सरकारी बिल्डिंग को तोड़ने का फैसला कर लिया गया है। आने वाले समय मे बद्रीश भगवान का मंदिर भी भव्य दिखेगा।
हमने चमोली के घाट का नाम बदलकर नंदा देवी के नाम पर रख दिया है। अब उसका नाम नंदा नगर है। लोग घाट के नाम से संकोच करते थे, जिसे लेकर लोग लंबे समय से मांग भी कर रहे थे। नंदा नगर से आगे देवाल ब्लॉक है। तीन-चार साल पहले देवाल से 10-15 बच्चे देहरादून आए थे। वे विधानसभा में आए तो मैंने पूछा इनका क्या-क्या कार्यक्रम है? पता चला कि उन बच्चों को विधानसभा, एफआरआई, आईएमए, सर्वे ऑफ इंडिया, ओएनजीसी, राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय और ट्रेन दिखाई जाएगी।
मैंने बच्चों से पूछा इतने सारे नाम बताए जा रहे हैं, आपको सबसे ज्यादा देखने का मन क्या है? तो बच्चे बोले हमारा सबसे ज्यादा मन रेल देखने का है। अब वो रेल ऋषिकेश से 125 किलोमीटर की दूरी तय करके कर्णप्रयाग तक जाएगी। जिनके लिए रेल देखना स्वप्न था, अब रेल उनके पास चलकर जा रही है। वो अब रेल में देहरादून, दिल्ली, मुंबई जाएंगे और पूरी देश की यात्रा करेंगे।
चारधाम ऑल वेदर रोड भी हमारे लिए चमत्कारी है।इसमें सुप्रीम कोर्ट से रोक लगी हुई थी। सरकार ने पैरवी की तो आज सारी रोक हट चुकी है। अब उसमें तेजी से काम शुरु होगा। ऐसे काम जो पहले किसी के दिमाग में भी नहीं आये,कभी किसी ने सोचा भी नहीं वो सारी चीजें धरातल पर हो रही हैं। मुझसे कई बार पूछा जाता है कि आपको समय बहुत कम मिला, मैं कहता हूं समय जितना मिल सकता था, उतना ही मिला है, मैं कैसे समय बढ़ाऊं। जितना समय मुझे मिला मैंने कोशिश की है कि एक-एक पल में राज्य को आगे बढ़ने के लिए काम करूं।
हमने लगभग 500 से ज्यादा फैसले लिए हैं और उन फ़ैसलों का वित्तीय प्रबंधन करते हुए सबके शासनादेश भी निकाल रहे हैं। आज हमारा राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी कल्पना है कि देश के नंबर वन राज्य बनने की दिशा में हमें जाना है। उसके लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करना होगा। मैं अपने आपको एक विद्यार्थी मानता हूं। राजनीति का हाईस्कूल या इंटर का छात्र मानता हूं। मैं पहले दिन से ही सीख रहा हूं।
वैसे तो मनुष्य पूरी जिंदगी भर सीखता है। सीखने की कोई आयु नहीं होती है। मनुष्य जीवन के अंतिम दिन तक भी कुछ न कुछ सीखता रहता है। मैं अपने आप को शिक्षार्थी मानता हूं और मैं ट्रेनिंग ले रहा हूं। आप सब के सहयोग से हमें उत्तराखंड को नंबर वन राज्य बनाना है। मोक्षदायिनी मां गंगा के किनारे खड़े होकर अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए उन्हीं के शब्दों से अपनी वाणी को विराम देता हूं…
बाधाएं आती हैं तो आएं…घेरे प्रलय की घोर घटाएं…
पांव के नीचे अंगारे…सर पर बरसे यदि ज्वालाएं…
निज हाथों में हंसते-हंसते…आग लगाकर जलना होगा…
कदम मिलाकर चलना….कदम मिलाकर चलना












