उत्तराखंड में विकास के लिए सामूहिकता के साथ आगे कैसे बढ़ा जाए, अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को विकास के इस महायज्ञ से कैसे जोड़ा जाए, इन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए उत्तराखंड सरकार और हिल-मेल ने ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित गंगा रिसोर्ट में ‘रैबारः एक नए उत्तराखंड का’ कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट गवर्नर गुरमीत सिंह (रिटा.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उत्तराखंड से संबंध रखने वाली तमाम हस्तियों ने उत्तराखंड के विकास के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत को विशेष श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, नेशनल टेक्नीकल रिसर्ट आर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) के प्रमुख अनिल धस्माना, मशहूर गीतकार एवं सेंसर बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी, इंडियन स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटा.), एनडीएमए के मेंबर राजेंद्र सिंह, एनडीआरआई करनाल के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान, सीडीएस जनरल बिपिन रावत के मामा कर्नल सत्यपाल परमार (रिटा.), ऋषिकेश की मेयर अनीता ममगाईं ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में प्रबुद्ध उत्तराखंडी देश के अलग-अलग हिस्सों से ऋषिकेश पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये भी कई जगह देखा गया।
रैबार के पहले सत्र में उत्तराखंड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह हमारे राज्य के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में आर्गेनिक सेक्टर में काफी काम किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में राज्य को केंद्र द्वारा कई पुरस्कार मिले हैं।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटा.) ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के सेना में योगदान को याद करते हुए कहा कि रैबार बड़ा ही खूबसूरत शब्द है। संदेश देने के लिए गंगा के किनारे से बेहतरीन कोई जगह नहीं हो सकती। उत्तराखंड के इन सपूतों को देवभूमि के विकास के लिए एक मंच पर लाने की कोशिश बहुत अच्छी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। यहां हो रहे विकास कार्यों को देखकर ऐसा नजर भी आता है। उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है। मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि राजभवन देश की सेवा करने वाले सैनिकों के लिए हमेशा खुला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्वास ही नहीं होता कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत अब हमारे बीच नहीं हैं। वो देश और प्रदेश का गौरव थे। उनकी सादगी और सरलता से लगता ही नहीं था कि वो सीडीएस जैसे शीर्ष ओहदे पर थे। वीर शहीद जनरल बिपिन रावत का उत्तराखंड से बेहद लगाव था। वह मेरे लिए एक अभिभावक के समान थे। आज भी जब उनके साथ बिताया समय याद आता है तो आंखें भर आती हैं। सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के जो लोग बाहर हैं, जिन्होंने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है, हम सभी क्षेत्रों में काम करने वाले ऐसे लोगों के विचार जानना चाहते हैं कि कैसे हम मिलकर अपने प्रदेश को आत्मनिर्भर बना सकें। अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और विभिन्नताओं में कैसे सामंजस्य बिठाया जाए और कैसे हम आगे बढ़े। इस पर लगातार मंथन चल रहा है।
उन्होंने कहा कि जब मैं इस राज्य के पहाड़ों की ओर देखता हूं तो मुझे एक प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है, जोकि ईमानदारी, सच्चाई,साहस और दैवीय प्रकाश की प्रतिध्वनि है। उन्होंने कहा, हमने हर क्षेत्र में का करने का प्रयास किया है। 5 महीने के कार्यकाल में मैंने पूरी क्षमता के साथ अपना काम किया। हम सब मिलकर उत्तराखंड को नंबर वन राज्य बनाएंगे। जब 2025 में उत्तराखंड के 25 साल होंगे आप नंबर वन उत्तराखंड देखेंगे।
एनटीआरओ के प्रमुख अनिल धस्माना ने कहा कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उत्तराखंड में काफी संभावनाएं हैं। देश का पहले ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर इसी राज्य में हैं। यहां से देश के लिए बड़े कार्य हो रहे हैं। उन्होंने सीडीएस जनरल रावत से अपने संबंधों का भी जिक्र किया। वहीं ले. जनरल अनिल भट्ट ने स्पेस टेक्नोलॉजी की बात की जबकि एनडीआरआई के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान के कहा कि आधुनिक खेती और डेयरी तकनीक अपनाकर उत्तराखंड के किसान प्रगति कर सकते हैं। राजेंद्र सिंह ने एनडीएमए ने द्वारा उत्तराखंड में की गई पहलों का जिक्र किया।
मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में अक्सर हम सुनते थे कि ‘फूल वही सर चढ़ा जो चमन से निकल गया, इज्जत उसी को मिली जो वतन से निकल गया’ इसे बदलने की आवश्यकता है। जो बाहर चला गया, अपना नाम कर लिया उसकी प्रतिध्वनि यहां सुनाई देती थी। इसे बदलना होगा और रैबार कार्यक्रम उस दिशा में अहम कदम है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को याद करते हुए कहा कि जब भी मैं उनसे मिलता वह हमेशा उत्तराखंड के विकास की बात करते थे। गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने फैसला किया है कि देहरादून में बन रहे सैन्य धाम का नाम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर होगा।
आईटीबीपी के एडीजी मनोज रावत ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को याद करते हुए कहा कि आज का वातावरण काफी अलग है। हम अपने उत्तराखंड के महानायक और देश के सीडीएस जनरल बिपिन रावत जी को रैबार के माध्यम से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा ने कहा कि बॉर्डर पर स्थित गांवों के लोगों को वहां रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हमें 14 से 24 साल के बच्चों की चिंता करनी है, उन्हें सही मार्ग दिखाने की जरूरत है।
इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर शौर्य डोभाल ने कहा कि जब हम सरकार की बात करते हैं तो दो चीजों की उससे अपेक्षा की जाती है। पहला, सुरक्षा और दूसरा खुशहाली। समय के साथ दोनों क्षेत्रों में यह बढ़ती जाती है। उत्तराखंड का देश की सुरक्षा में अमूल्य योगदान है। अब खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ने है।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड की लोकगायिका रेखा धस्माना ने सीडीएस जनरल रावत के लिए विशेष रूप से लिखा गीत गया। इसके साथ ही उन्होंने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को भी सुरीली श्रद्धांजलि दी। आईटीबीपी के प्रख्यात गायक अर्जुन खेरियाल ने भी सीडीएस जनरल बिपिन रावत को सुरीली श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड की कई जानी मानी शख्सियतों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में हिल-मेल शिखर पर उत्तराखंडी टॉप-50 पत्रिका का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में आज तक के संपादक मनजीत नेगी का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम के अंत में परमार्थ निकेतन के सहयोग से सीडीएस जनरल रावत और मधुलिका रावत के लिए विशेष गंगा आरती और दीपदान का आयोजन किया गया।
“देवभूमि को आज अपने अनुभवी बेटे और बेटियों की जरूरत है। हम मिलकर इस राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे, यह मेरा पूर्ण विश्वास है।“
– लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटा.), राज्यपाल उत्तराखंड
“उत्तराखंड को नंबर वन बनाने की यह यात्रा एक करोड़ 25 लाख लोगों की सामूहिक यात्रा है। यह अपने गंतव्य तक तभी पहुंचेगी जब सब लोग मिलकर इसे आगे बढ़ाएंगे।“
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
“उत्तराखंड का ड्रोन सेंटर बहुत महत्वपूर्ण है। इस सेंटर के शुरू होने के बाद उत्तराखंड में आपदाओं के दौरान ड्रोन्स का पूरा उपयोग किया गया। यह एक छोटा सा प्रयास था, आगे बड़े प्लान हैं।“
- अनिल धस्माना, प्रमुख एनटीआरओ
“उत्तराखंड में रीजनल नहीं वर्ल्ड क्लास फ़िल्म इंस्टीट्यूट होना चाहिए, यहां से बहुत टैलेंट निकलेगा क्योंकि प्रतिभागियों की यहां कोई कमी नहीं है। यहां अवसरों की बढ़ाने की जरूरत है।“
- प्रसून जोशी, कवि, गीतकार, प्रमुख सेंसर बोर्ड
“उत्तराखंड में दूरदराज के इलाकों में कनेक्शन के लिए सेटेलाइट से बढ़िया कोई विकल्प नहीं हैं। एक ही सेटेलाइट पूरे उत्तराखंड को कम्युनिकेशन उपलब्ध करा सकती है।“
- लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटा.), महानिदेशक, इंडियन स्पेस एसोसिएशन












