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सैन्यधाम का नाम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर होगा

गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड

मैं जब भी दिल्ली जाता था सीडीएस जनरल बिपिन रावत से मिलने जरूर जाया करता था। वो हमेशा देश की बात करते थे। उत्तराखंड की बात करते थे। उत्तराखंड के विकास की बात करते थे। देश की सेना में 7.5 प्रतिशत की पूर्ति हमारा उत्तराखंड जैसा छोटा सा राज्य करता है। देश की सीमा पर रक्षा करने वाला हर पांचवा सैनिक हमारे उत्तराखंड से होता है।

चाहे फर्स्ट वर्ल्ड वार हो, चाहे सेकेंड वर्ल्ड वार हो, चाहे 62 हो, 65, 71 हो कारगिल हो, पुलवामा हो, गलवान हो, संसद पर हमला हो, चाहे 26/11 में ताज पर आतंकी हमला हो, कोई न कोई जवान हमारे उत्तराखंड से शहीद होता है। अभी हाल ही में 7 जवान हमारे यहां से शहीद हुए हैं।

उन्होंने कहा, हमारे नौजवान सेना में भर्ती होना चाहते हैं, क्योंकि हमारे उत्तराखंड के लोगों की हाइट कम हुआ करती थी। मैं जनरल बिपिन रावत के पास गया, उस समय मैं एमएलए था। साल 2016-2017 की बात होगी। आज उत्तराखंड के नौजवानों को सेना में भर्ती होने की 5 सेंटीमीटर की जो छूट मिली है, वह जनरल बिपिन रावत के कारण मिली है, मैं उनको नमन करता हूं, प्रणाम करता हूं।

एक बार मैंने जनरल साहब से कहा कि हमें बीआरओ दे दो। तो जनरल साहब कहने लगे कि गणेश मैं बीआरओ तो ऐसे ही दे दूंगा, तुम एक काम करो। तुम मुझसे एक टीए की पलटन, यहां के लिए मांगों और एक कुमाऊं के लिए, मैं तुम्हें दोनों दे दूंगा। 1500 लोगों को रोजगार मिलेगा और हमारे बॉर्डर भी सुरक्षित रहेंगे। ऐसा महान व्यक्तित्व जनरल रावत का था। कई घटनाएं हैं, बहुत लंबी लिस्ट हो जाएगी।

आज तो मैं मिनिस्टर बन गया हूं, जब मैं उनसे पहली बार मिला था तब मैं एमएलए था। कभी भी उन्होंने चीफ की कुर्सी पर बैठकर मुझसे बात नहीं की, हमेशा अलग हटकर मुझसे बात करते थे। हम सैन्यधाम बना रहे हैं, मैं उनके पास गया, मैंने कहा, जनरल साहब हमें सैन्यधाम के लिए टैंक चाहिए, वेसल्स चाहिए, आर्टिगंस चाहिए और 25दिन के अंदर सारा का सारा समान सेंक्शन दिया। आधे से ज्यादा समान हमारे सैन्यधाम के लिए आ गया है।

ऐसा व्यक्तित्व आज हमें छोड़कर चला गया है। हमारी सरकार ने संकल्प लिया कि किसी व्यक्ति को जिंदा वापस नहीं ला सकते। किसी शहीद को हम जिंदा वापस नहीं ला सकते। लेकिन उसकी वीरता का व्याख्यान करना, उसके बारे में जानकारियों को देना हमारी जिम्मेदारी है, हमारी सरकार पूरी ईमानदारी से इस कार्य को कर रही है।

प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अभी तक हमारे उत्तराखंड से 1734 शहीद हुए हैं, उनके घरों से पवित्र मिट्टी को लेकर हम देहरादून आए हैं और उस पवित्र मिट्टी से हम सैन्य धाम का निर्माण कर रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अभी 20  तारीख को वहां उस मिट्टी से उसका पूजन किया था और हमने संकल्प लिया है कि हम उस सैन्यधाम का नाम हमें अचानक छोड़कर चले गए उत्तराखंड के इस वीर के नाम पर होगा। जनरल बिपिन रावत के नाम पर उस सैन्य धाम का नाम होगा।

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