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रैबार का असर, दिग्गजों ने कहा- लौटेंगे पहाड़ की ओर

खूबसूरत टिहरी झील पर आयोजित रैबार 2 के दूसरे सत्र में पहाड़ की जानी मानी हस्तियों ने राज्य के विकास को लेकर अपने विचार रखे। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट ने कहा कि गढ़वाल रेजिमेंट के इतिहास में एक अंग्रेज ने लिखा था कि सिपाही का जज्बा इनके खून में होता है। उन्होंने कहा कि जब मैं स्कूल से ट्रेनिंग के लिए सेना में गया तो उस समय कम ही प्रोफेशन थे, जिसमें लोग जा सकते थे। हालांकि आज उत्तराखंड के लोग हर क्षेत्र में जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज विचार कीजिए कि 40 साल पहले हम कहां थे और आज कहां हैं। मुझे गर्व है कि हमारे राज्य ने सैनिकों और उनके परिवार को इज्जत दी है, उसके लिए मैं सरकार को शुक्रिया अदा करता हैं। अनिल भट्ट ने कहा कि आज यहां बात हुई है और मैं कहना चाहता हूं कि मैं भी जब रिटायर हूंगा, तो मसूरी में आकर रहूंगा, जो हो सकेगा मैं अपने राज्य अपने पहाड़ के लिए करूंगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने टूरिज्म पर ध्यान देना होगा। अनिल भट्ट ने सुझाव दिया कि अगर सरकार विचार करे तो FTII का एक इंस्टिट्यूट उत्तराखंड में खोला जा सकता है। 

इसके बाद FTII के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला ने कहा कि अगर देश में आईआईटी और आईआईएम कई हो सकते हैं तो फिल्म संस्थान 2 ही क्यों। उन्होंने कहा कि अकेले मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से 40 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कैंथोला ने कहा कि लोग सिनेमा को मनोरंजन के लिए समझते हैं पर यह भी रोजगार का क्षेत्र है। मुझे यह जानकर दुख होता है कि जब भी एफटीआईआई की परीक्षा होती है तो सबसे कम छात्र उत्तराखंड के होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार प्रयास करे और केंद्र से मांग करे तो हम यहां एक फिल्म शैक्षणिक केंद्र खोलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने राज्य के बच्चों को अंग्रेजी ज्ञान पर जोर देने और प्रवासियों से अपने स्तर पर राज्य घूमने के लिए लोगों को भेजने का सुझाव दिया।  

कैंथोला ने कहा कि वह हर साल छुट्टी पर अपने गांव और खासतौर से बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए जाते हैं। उन्होंने इसी साल मुंबई से 10 लोगों को उत्तराखंड घूमने के लिए भेजा था। 

मस्कट से आए कारोबारी शिव बहुगुणा ने कहा कि मैं टिहरी का रहने वाला हूं और पिछले 15-16 साल से मस्कट में रह रहा हूं। उन्होंने कहा कि रैबार जैसे प्रोग्राम राज्य ही नहीं, जिले या ब्लॉक स्तर पर शुरू होने चाहिए। शिव ने कहा कि हमें दुनिया में यह बताने में गर्व होता है कि मैं देवभूमि से हूं। हमारे यहां किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है, बस पहल का अभाव है। बहुगुणा ने कहा कि पर्यटन से राज्य को आगे ले जाया सकता है। पीएम मोदी भी जितने देशों में गए तो उन्हें पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की। पर्यटन से हम पलायन को भी रोकते हैं। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि हर ब्लॉक में हम टूरिज्म हट बनाएं उससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें सरकार की फंडिंग भी जरूरी नहीं है बल्कि इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से किया जाए। 

इससे पहले रैबार 2 के दूसरे सत्र की शुरुआत में रविवार को प्रवासी उत्तराखंडियों को अपने राज्य की विशेषताओं पर तैयार की गई एक फिल्म दिखाई गई। इसमें प्रदेश के विभिन्न मंदिरों, घूमने के स्थल, फिल्म शूटिंग के स्थलों, ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए जगह, सांस्कृतिक विविधताओं आदि की जानकारी दी गई। 

रैबार 2 के दूसरे सत्र की शुरुआत में उत्तराखंड की मशहूर लोकगायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट और उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति वैदिक मंगल गीतों पर आधारित थी। इसके बाद मां गंगा की स्तुति की गई। ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलने के बाद शिव ने आपको अपनी जटाओं में धारण किया। इसी पर केंद्रित थी बसंती जी की अगली प्रस्तुति। बोल थे- जय जय गंगे मइया…जय जय उत्तराखंडे। 

हिमालय की देवियों को आमंत्रित करते हुए गाए जाने वाले गीत को बसंती जी ने जब गाया तो श्रोता और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी भावविभोर हो गए। रैबार 2 में आए कई मेहमान अपने मोबाइल से इस पारंपरिक गीत को रिकॉर्ड करते देखे गए। स्थानीय संगीत और देशज लोकराग ने सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

इससे पहले रैबार 2 के पहले सत्र में उत्तराखंड के वीर सपूतों के परिजनों को आर्मी जनरल बिपिन रावत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सम्मानित किया। आर्मी चीफ ने अपने संबोधन में भी उत्तराखंड के जवानों की प्रशंसा की। 

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